होली से पहले मिलावट पर खानापूर्ति, नमकीन फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई पर उठे सवाल

चंदौली
होली के मद्देनज़र खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ सघन जांच अभियान शुरू करने का दावा किया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर त्योहार आते ही विभाग की नींद क्यों खुलती है? साल भर बाजार में बिक रहे खोवा, पनीर और नमकीन की जांच क्यों नहीं होती?
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के आदेश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत टीम ने खोवा, पनीर और नमकीन फैक्ट्रियों से नमूने लिए हैं। पहले चरण में मोबाइल प्रयोगशाला के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया गया और खोवा व्यापारियों को चेतावनी दी गई कि वे मिलावटी सामान न खरीदें, न बेचें।
इसी क्रम में उप जिलाधिकारी सदर के निर्देश पर पड़ाव स्थित एक नमकीन फैक्ट्री पर छापा मारकर नमकीन और बेसन के दो नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि हर साल त्योहारों से पहले नमूने लेने और चेतावनी देने की कवायद होती है, जबकि मिलावट का धंधा पूरे साल जारी रहता है।
विभाग ने कहा है कि यदि मिलावटी खोवा, पनीर, नमकीन या खाद्य तेल की बिक्री या परिवहन पाया गया तो खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई होगी। हालांकि आम जनता पूछ रही है कि पिछले वर्षों में कितने मामलों में ठोस सजा हुई और कितनों पर केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के.एन. त्रिपाठी के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रणधीर सिंह व पुलिस बल शामिल रहे। विभाग ने लोगों से अपील की है कि मिलावट की सूचना मोबाइल नंबर 8887890254 पर दें, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिकायत मिलने पर क्या वाकई सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह अभियान भी कागज़ी साबित होगा।



