भ्रष्टाचार की सारे हदों को पार करता शिक्षा विभाग –


गरीब बच्चों को पढ़ने का हक नहीं हैं, क्योंकि बेसिक शिक्षा अधिकारी पर बाहरी दवाब हावी हैं। कोर्ट ने कहा हैं शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत् रजिस्टर्ड स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 25% सीट आरक्षित रहेगी। लेकिन यह तय कैसे होगा कि इस स्कूल में एडमिशन हुआ हैं। बहुत से गार्जियन दवाब के कारण अपना दुखड़ा भी कह नहीं पाते, जिसका पूरा लाभ भ्रष्टाचार की समस्त सीमाओं को लांघ विभाग कर रहा हैं। जिले में दुर्भाग्य की स्थिति तो तब बन जाती हैं जब सचिन कुमार जैसे बेसिक अधिकारी तय नहीं कर पाते उन्हें करना क्या हैं। एक बार कहते हैं मुझे लिखित में चाहिए वोही दूसरी तरफ़ शिकायती पत्र में कहते हैं ऊपर से दवाब हैं। जब कोर्ट कहे तो वोह दवाब नहीं, लेकिन ऊपर से दवाब का मतलब भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना हैं या फिर जेब भरना हैं, इसका भी तय मानक हो तो सच्चाई खुल कर आए।



