सिक्स लेन सड़क निर्माण में डीपीआर को ठेंगा दिखा रहे हैं पीडब्ल्यूडी अधिकारी: संतोष पाठक

काली मंदिर को शौचालय के पास न बनवाए प्रशासन – संतोष कुमार पाठक एडवोकेट
एडीएम चंदौली को सौंपा गया ज्ञापन
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय)।
नगर में चल रहे सिक्स लेन सड़क निर्माण कार्य को लेकर नगर के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार पाठक एडवोकेट ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि पीडब्ल्यूडी अधिकारी डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं।
अधिवक्ता पाठक ने बुधवार को अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने मांग की कि गल्ला मंडी से सपा कार्यालय तक सड़क का निर्माण डीपीआर के अनुसार सिक्स लेन में कराया जाए।
उन्होंने कहा कि “पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर लंबे समय से जाम की समस्या से जूझ रहा है। जनता को राहत देने के उद्देश्य से सिक्स लेन सड़क योजना बनी थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने इस योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है। अधिकारी अपनी सुविधा और निजी लाभ के लिए सड़क की चौड़ाई घटा रहे हैं, जो जनता के साथ नाइंसाफी है।”
पाठक ने बताया कि गल्ला मंडी से जीटीआर ब्रिज तक संशोधित डीपीआर में सिक्स लेन सड़क प्रस्तावित है, किंतु अधिकारी वहां भी फोरलेन बनवाने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि “जहां सबसे अधिक जाम लगता है, वहीं सड़क को चौड़ा करने की जगह पतला किया जा रहा है। अधिकारी और ठेकेदार मिलकर सड़क के दो लेन ही खा गए। यह जनता के हित के विपरीत है।”
🔹 काली मंदिर निर्माण पर आपत्ति
संतोष कुमार पाठक एडवोकेट ने काली मंदिर के निर्माण स्थल को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि “शौचालय के बगल में काली मंदिर का निर्माण उचित नहीं है। वह भूमि पीडब्ल्यूडी की संपत्ति है और नियमों के अनुसार विभागीय भूमि पर धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मंदिर को गल्ला मंडी के पश्चिम दिशा में पोखरी के पास स्थित उस भूखंड पर बनाया जाए, जो पहले से मंदिर के नाम आवंटित है। इससे न तो धार्मिक भावना आहत होगी और न ही नियमों का उल्लंघन होगा।
🔹 भ्रष्टाचार से बिगड़ा चौड़ीकरण का उद्देश्य
पाठक ने कहा कि “मुगलसराय में सड़क निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। जहां भयंकर जाम लगता है, वहां फोरलेन बन रहे हैं। अगर अतिक्रमण हटाकर सही तरीके से सिक्स लेन सड़क बनाई जाती, तो आने वाले कई वर्षों तक नगर को जाम से राहत मिल सकती थी। परंतु अफसरों की मनमानी से यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है।”


