उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई अक्टूबर से ठप,, जिले में भी असर,, यूनियन ने उठाए सवाल- –

चंदौली—-
पढ़ कर क्या करेंगे गरीबों के बच्चे, सरकारी संस्थानों को विशेष सरकारी टीचर वोह कुछ करने को तैयार,, सिर्फ़ पढ़ाना ना पड़े,, जिले के अधिकांश स्कूलों का हाल बेहाल हैं।। धानापुर तो नए रिकॉर्ड रोज़ करता है।
कोई देखने पूछने वाला नहीं है। यूनियन ने समस्त अधिकारियों के बीच यह प्रश्न उठाया।।
टीचर और शिक्षा-मित्र SIR में झोंक दिए गए हैं।

काम में कोताही के नाम पर कुछ टीचरों के खिलाफ FIR दर्ज करके बाकी टीचरों के बीच डर कायम कर दिया गया है।
निर्देश देने वाले अधिकारियों को खुद पता नहीं है कि करना क्या है।
न कोई प्रॉपर ट्रेनिंग हुई है, न किसी तरह की वर्कशॉप।
सारा काम मोबाइल फोन पर ही करना है।
दो-ढाई हज़ार एंट्रियाँ फोन पर ही करनी हैं, कोई कंप्यूटर नहीं, लैपटॉप नहीं।
फोन की छोटी-सी स्क्रीन पर हज़ारों फॉर्म भरने हैं, बिना गलती के। हर तीसरे-चौथे दिन अपडेट आता है।
निर्देश देने वाले अधिकारियों को खुद नहीं मालूम कि करना क्या है। सब कुछ व्हाट्सऐप से हो रहा है।
सुबह-सुबह एक वीडियो ग्रुप में आता है, जिसमें एक मोबाइल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग होती है। बस एक लाइन का संदेश होता है, “वीडियो देख लीजिए और इसी हिसाब से सारी एंट्रियों में बदलाव कीजिए।”
मोबाइल पर लाखों एंट्रियाँ करते हुए टीचरों की आँखों और सिर में दर्द की शिकायत हो गई है। लेकिन काम रुक नहीं सकता, क्योंकि सिर पर FIR की तलवार लटक रही है।
कोई हैरानी नहीं की लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं।
सही तरीका तो यह था कि काम लैपटॉप पर होता, इस काम के लिए प्रशिक्षित लोग हायर किए जाते। लेकिन मुफ़्त के कामगार हैं तो खर्च क्यों किया जाए?
वैसे भी सरकारी स्कूलों में तो गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं, वो पढ़कर भी क्या ही कर लेंगे।

