
चंदौली।
जनपद चंदौली में अवैध मेडिकल स्टोर और अवैध पैथोलॉजी सेंटरों का ऐसा खुला और निर्भीक नेटवर्क खड़ा हो चुका है कि अब यह सीधे-सीधे योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है।
एक तरफ पुलिस कोडीन युक्त सिरप के अवैध कारोबार में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कर रही है, तो दूसरी तरफ सवाल यह है कि यह नशीला जहर आखिर आ कहां से रहा है? जवाब साफ है—बिना लाइसेंस चल रहे मेडिकल स्टोर, जो स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे वर्षों से संचालित हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में दर्जनों मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटर ऐसे हैं जिनका
- न पंजीकरण है,
- न योग्य फार्मासिस्ट,
- न जांच उपकरणों की मान्यता,
फिर भी वे बेखौफ चल रहे हैं। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित संरक्षण की ओर इशारा करती है।
स्थानीय लोग खुलेआम यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब हर मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटर की जिम्मेदारी सीएमओ और एडिशनल सीएमओ कार्यालय की होती है, तो बिना उनकी मिलीभगत यह अवैध साम्राज्य कैसे खड़ा हो गया?
क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों में होता है?
क्या कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रखी जाती है?
अवैध पैथोलॉजी सेंटरों की मनमानी जांच रिपोर्टों से मरीजों की जान खतरे में है, वहीं अवैध मेडिकल स्टोर से बिक रही नशीली दवाएं युवाओं को अपराध और नशे की ओर धकेल रही हैं। यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का भी गंभीर संकट बन चुका है।
अब जनपद में यह चर्चा आम है कि
अगर पुलिस कोडीन माफिया पकड़ सकती है, तो स्वास्थ्य विभाग का मेडिकल माफिया क्यों अछूता है?
क्या कार्रवाई से पहले “ऊपर” से इजाज़त का इंतज़ार किया जा रहा है?
जनता जानना चाहती है—
कब टूटेगा अवैध मेडिकल और पैथोलॉजी माफिया का यह नेटवर्क?
और क्या योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति चंदौली में सिर्फ नारा बनकर रह गई है?



