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२ दिवसीय आस्था का मेला शुरू, प्रशासन मुस्तैद –

सकलडीहा –

                  परंपराओं के इस देश में जहां अलग अलग प्रकार से त्यौहारों को मनाया जाता हैं। वोही सुनी गोद भरने की परम्परा सकलडीहा से महज़ ५ किलो मीटर पूर्व दिशा में स्थित एक ऐसा मंदिर जहां दिवाली बीतने के साथ ही दो दिवसीय मेला की शुरुआत हो जाती हैं। गांव जामडीह हैं, जहां लोगों के अनुसार महादेव खुद से प्रगट हुए हैं, तालाब भी मान्यताओं के अनुसार खुदवाया गया हैं। गांव की महिलाओं ने बताया जिस महिला की गोद अब तक सुनी हैं, यहां आकर महादेव से मांगे तो गोद भरने की प्रकिया पूर्ण होती हैं। दिवाली के बीतते ही भोर से ही यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो जाती हैं। तालाब में नहा कर अपने कपड़े का परित्याग करना पड़ता हैं, उसके उपरांत जागेश्वर महादेव के दरबार में जा कर विनती करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं।२ दिवसीय मेले का आयोजन में प्रशासन पूरे मुस्तैदी के साथ सहयोग करता हैं। आस पास ग्रामीणों के अलावा दूर दराज से लोग भी अपनी पीड़ा महादेव को बताते हैं। जादू टोना, भूत प्रेत इत्यादि से भी काफ़ी राहत मिलने की बात मान्यताओं में दर्ज हैं। मंदिर की महिमा व तालाब का पानी दोनों ही निराश दंपतियों के लिए आशा की किरण बनती है।

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