सकलडीहा में यूजीसी के नए दिशानिर्देशों के खिलाफ युवाओं का विरोध। प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग-

सकलडीहा (चंदौली)। University Grants Commission (यूजीसी) द्वारा हाल ही में जारी नए दिशानिर्देशों के विरोध में सकलडीहा क्षेत्र के युवाओं में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है। विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन नियमों पर पुनर्विचार की मांग उठानी शुरू कर दी है। युवाओं का कहना है कि नए प्रावधान शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समरसता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

इसी क्रम में बभनपुरा गांव के प्रधान पद के प्रत्याशी एवं युवा नेता रोहित तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम समाज की अखंडता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय ऐसे स्थान होते हैं जहां समाज के हर वर्ग के छात्र एक साथ अध्ययन करते हैं, आपसी संवाद और सहभागिता के माध्यम से सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं। ऐसे में यदि कोई भी नियम छात्रों के बीच दूरी या विभाजन की स्थिति उत्पन्न करता है तो यह चिंताजनक है।
रोहित तिवारी ने आशंका जताई कि यदि सरकार का रवैया इसी प्रकार बना रहा तो भविष्य में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि बांटना। इसलिए आवश्यक है कि किसी भी नए दिशा-निर्देश को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद स्थापित किया जाए।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार इस विषय पर पुनर्विचार करे और ऐसा समाधान निकाले जो सभी वर्गों के हित में हो।
क्षेत्र के अन्य युवाओं ने भी सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त की है। कई छात्र नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और सक्रियता देखने को मिल सकती है।



