अमृत सरोवर के बदहाली का जिम्मेदार कौन, जनता या प्रशासन –


सकलडीहा – जिले में मनरेगा सेल व पंचायती राज, दोनों महत्वपूर्ण विभाग हैं जो लगातार प्रयासरत रहते हैं। मनरेगा तो पूरे प्रदेश में सबसे ज़्यादा खर्च करने वाला जिला बन चुका हैं। जहां खर्च के आंकड़े जिले को आकांक्षी जिले से सामान्य जिले में लाने के लिए प्रयासरत हैं।। लेकिन कुछ अधिकारियों को छोड़ दे तो अधिकांश अधिकारी सिर्फ़ खानापूर्ति करते दिखते हैं। डीसी मनरेगा जहां फंड के मायने में कोई कोताही नहीं करते हैं,, वोही ब्लॉक पर विराजमान खंड विकास अधिकारी समस्त नियमों को आईना दिखाते हैं। अमृत सरोवर योजना जहां तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए बनी हैं,, लेकिन अधिकांश तालाबों पर अवैध कब्जा व कूड़े करकट से पट चुके हैं,,9 ब्लॉक में मात्र दर्जन से भी कम तालाब देखने व अमृत सरोवर को दर्शाते हैं लेकिन मात्र सिर्फ़ कुछ गिने चुने,, तो लगातार रोस्टर के अनुसार सफाई हो कहा रही हैं। प्रदेश के मंत्री के कहा हैं लगातार 3 दिन बड़े पैमाने पर सफाई होगी लेकिन सिर्फ़ अखबार में,, अमृत सरोवर की सच्चाई बया करने का काम जसों की मड़ई सकलडीहा ब्लॉक का तालाब बताने का कार्य कर रहा हैं। लेकिन धानापुर, सकलडीहा, चहनिया ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायत स्तर पर तालाब अपने जीर्णोद्धार की राह खोज रहा हैं। सफाई का स्तर इस समय बेपटरी हो चुका हैं लेकिन अधिकांश एडीओ पंचायत त्यौहारों में व्यस्त है।



