
चंदौली। एशिया की सबसे बड़ी चंदासी कोयला मंडी में तौल व्यवस्था पूरी तरह बेलगाम है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि बाट-माप विभाग आंख मूंदे बैठा है। वर्षों से मंडी में संचालित कांटो का न तो सत्यापन किया गया और न ही कभी औचक छापेमारी हुई। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि तौल में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है और उपभोक्ता से लेकर छोटे व्यापारियों तक को चूना लगाया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता यूं ही नहीं है—मंडी और बाट-माप विभाग के बीच अंदरखाने कुछ न कुछ “खिचड़ी” जरूर पक रही है। सवाल यह भी है कि यदि सब कुछ दुरुस्त है तो नियमित जांच और छापेमारी से विभाग क्यों कतरा रहा है?
अब यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत और संरक्षण का बनता जा रहा है। जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी खुद ही कई सवाल खड़े कर रही है।



