51 लीटर शराब पकड़ी, बेखौफ तस्करी, पुलिस के साथ-साथ आबकारी विभाग की भूमिका भी संदिग्ध

चन्दौली।
थाना अलीनगर व आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में 51.20 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब के साथ 05 तस्करों की गिरफ्तारी ने भले ही पुलिस की एक सफलता दर्ज कराई हो, लेकिन यह कार्रवाई जनपद में सक्रिय शराब तस्करी के गहरे और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। अब इस पूरे मामले में पुलिस के साथ-साथ आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
पुलिस के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को जी.टी.आर. पुल के पास एक ऑटो से 234 पीस 8PM व 50 पीस आफ्टर डार्क शराब बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत बिहार प्रांत के अनुसार करीब 1.20 लाख रुपये बताई जा रही है। पकड़े गए सभी अभियुक्त बिहार के निवासी हैं, जिन्होंने पूछताछ में कबूल किया कि वे स्थानीय दुकानों से थोड़ी-थोड़ी शराब खरीदकर इकट्ठा करते थे और फिर उसे ऑटो के जरिए बिहार ले जाकर ऊँचे दामों पर बेचते थे।
यह खुलासा कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
जब शराब स्थानीय दुकानों से खरीदी जा रही थी, तो आबकारी विभाग की नियमित निगरानी और स्टॉक चेकिंग कहां थी?
क्या बिना आबकारी की जानकारी या मिलीभगत के इतनी मात्रा में शराब का एकत्र होना संभव है?
सूत्रों की मानें तो जनपद में लंबे समय से शराब तस्करी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई प्रायः तब ही होती है जब मामला मीडिया या किसी बड़ी बरामदगी तक पहुंच जाता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आबकारी विभाग की चेकिंग सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है, जिसका फायदा तस्कर बेखौफ होकर उठा रहे हैं।
पुलिस ने इस मामले में मु.अ.सं. 0058/26 धारा 60/63 आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर कानूनी कार्रवाई की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि जब तस्कर खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वे लंबे समय से शराब इकट्ठा कर बिहार भेज रहे थे, तो अब तक कितनी खेप बिना किसी रोक-टोक के निकल चुकी होगी?
एक ऑटो से 51 लीटर शराब पकड़े जाने की घटना यह साफ संकेत देती है कि कार्रवाई तस्करी के नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंच पा रही है। जब तक पुलिस और आबकारी विभाग दोनों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक जनपद में अवैध शराब पर पूरी तरह नकेल कस पाना मुश्किल नजर आ रहा है।



