चंदौलीपुलिस

तेल चोरी का संगठित खेल बेनकाब, मगर पुलिस पर भी उठ गंभीर सवाल

चन्दौली। अलीनगर थाना क्षेत्र में इंडियन ऑयल टर्मिनल के पास टैंकरों से बड़े पैमाने पर तेल चोरी का संगठित खेल सामने आने के बाद जहां छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है, वहीं स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क में अलीनगर थाने पर तैनात एक मुख्य आरक्षी की संलिप्तता की भी जांच चल रही है।

संयुक्त टीम की छापेमारी में कुल 06 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से लगभग 950 लीटर अवैध डीजल/पेट्रोल, एक भरा हुआ तेल टैंकर (UP45T3570), एक अल्टो कार (UP70AR6884), एक वैगनार (UP67C0638), एक मोटरसाइकिल (UP67F2701), 05 मोबाइल फोन, 9000 रुपये नकद, 11 इंडियन ऑयल कंपनी के कार्ड तथा तेल चोरी में प्रयुक्त पाइप, कुप्पी, माप यंत्र और जैरिकैन बरामद किए गए।

कार्रवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य टर्मिनल से निकलने वाले टैंकरों को रास्ते में रुकवाकर चालक-खलासी से मिलीभगत करते थे। टैंकर का ताला काटकर तेल निकाला जाता था और 60 रुपये प्रति लीटर में खरीदकर 80 रुपये प्रति लीटर तक बाजार में बेचा जाता था। इस अवैध कमाई को आपस में बांट लिया जाता था। पुलिस के अनुसार यह कार्य लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा था।

मौके पर बरामद टैंकर के लॉक रॉड को काटकर तेल निकाला गया था, जिससे चैंबर से रिसाव भी हो रहा था। यह ज्वलनशील पदार्थ कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर तेल चोरी का खेल चलता रहा, यह अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर आर.के.बी.के. पेट्रोल पंप के पास स्थित कमरों से भी 650 लीटर डीजल/पेट्रोल बरामद किया गया। इससे साफ है कि चोरी का तेल व्यवस्थित रूप से भंडारित कर आगे खपाया जा रहा था।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि पूछताछ में अलीनगर थाने पर तैनात मुख्य आरक्षी रोशन यादव की संलिप्तता सामने आने की बात कही गई है। इस आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 127/2026 धारा 287, 316(3), 305(B), 317(2), 317(4), 61(2), 112 बीएनएस, धारा 23 पेट्रोलियम अधिनियम तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 के तहत दर्ज किया गया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि यदि स्थानीय स्तर पर पुलिस की मिलीभगत या संरक्षण न हो तो इंडियन ऑयल टर्मिनल जैसे संवेदनशील स्थल के आसपास इतने लंबे समय तक तेल चोरी कैसे चलती रही? क्या यह गिरोह पहली बार सक्रिय हुआ था या पहले भी इसी तरह टैंकरों से तेल गायब होता रहा और मामला दबा दिया जाता रहा?

घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि विभागीय जांच निष्पक्ष होती है तो कई और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी असली सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई से तेल चोरी के इस संगठित नेटवर्क पर स्थायी रोक लग पाएगी, या फिर कुछ समय बाद यह खेल किसी नए तरीके से दोबारा शुरू हो जाएगा।

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